आयकर नोटिस: इन 6 लेन-देन से बचें, नहीं तो आयकर विभाग भेजेगा नोटिस

आयकर विभाग ने कुछ ऐसे लेन-देन को पहचाना है जिन पर विभाग विशेष ध्यान देता है। यदि आप भी इन लेन-देन को करते हैं, तो आपको आयकर विभाग से नोटिस मिलना तय है। यह जरूरी है कि बैंक, म्यूचुअल फंड, ब्रोकर हाउस और प्रॉपर्टी रजिस्टार में कैश लेन-देन की सीमा को लेकर विभाग को जानकारी दें।
आइए जानते हैं 6 ऐसी लेन-देन के बारे में, जो आपको परेशानी में डाल सकती हैं और विभाग द्वारा नोटिस भेजे जाने का कारण बन सकती हैं।
1. 10 लाख रुपये से अधिक का FD जमा करना
यदि आप एक साल में 10 लाख रुपये से अधिक की राशि को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में जमा करते हैं, तो आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है। चाहे यह राशि एक बार में जमा की हो या कई बार में, या फिर कैश हो या डिजिटल भुगतान। विभाग आपको इस राशि के स्रोत के बारे में पूछ सकता है। 10 लाख रुपये या उससे अधिक की राशि यदि आप कैश में जमा करते हैं, तो बैंक को सीबीडीटी (CBDT) को इसकी सूचना देनी होती है।
2. बैंक अकाउंट में कैश जमा करना
सीबीडीटी का यह नियम है कि यदि आप एक वित्तीय वर्ष में किसी भी बैंक या सहकारी बैंक में 10 लाख रुपये या उससे अधिक की राशि जमा करते हैं, तो बैंक को आयकर विभाग को इसकी सूचना देनी होती है। इस नियम में चालू खाता और समयबद्ध जमा (टाइम डिपॉजिट) शामिल नहीं होते। यदि आप इस सीमा से अधिक राशि जमा करते हैं, तो आयकर विभाग आपसे इस राशि के स्रोत के बारे में पूछ सकता है।
3. संपत्ति का लेन-देन
यदि कोई व्यक्ति 30 लाख रुपये या उससे अधिक कीमत की संपत्ति खरीदता या बेचता है, तो संपत्ति रजिस्ट्रार को आयकर अधिकारियों को इसकी सूचना देनी होती है। इस स्थिति में आयकर विभाग आपसे यह सवाल कर सकता है कि आपने इतनी बड़ी राशि का लेन-देन कैसे किया। ऐसे लेन-देन में कई प्रकार के सवाल पूछे जा सकते हैं।
4. शेयर, म्यूचुअल फंड, डिबेंचर और बांड्स का बड़ा लेन-देन
यदि आप शेयर, म्यूचुअल फंड, डिबेंचर और बांड्स में 10 लाख रुपये या उससे अधिक की राशि का निवेश करते हैं, तो कंपनियां और संस्थाएं इसकी सूचना आयकर विभाग को देती हैं। इस प्रकार के बड़े लेन-देन से आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है और आपके निवेश के स्रोत के बारे में पूछ सकता है।
5. क्रेडिट कार्ड बिल का कैश में भुगतान
यदि आपका क्रेडिट कार्ड बिल एक लाख रुपये से अधिक है और आप इसे एक साथ कैश में चुकता करते हैं, तो आयकर विभाग आपको नोटिस भेज सकता है। इसके अलावा, यदि आप एक वित्तीय वर्ष में 10 लाख रुपये या उससे अधिक का क्रेडिट कार्ड बिल कैश में चुकता करते हैं, तो आपको इस राशि के स्रोत के बारे में आयकर विभाग को जानकारी देनी होगी।
6. कैश ट्रांजेक्शन में गड़बड़ी
अगर आप किसी अन्य बड़ी कैश लेन-देन (जैसे किसी अन्य व्यवसाय से जुड़े ट्रांजेक्शन) में शामिल होते हैं, तो यह भी आयकर विभाग के रडार पर आ सकता है। विभाग कैश लेन-देन के स्रोत और उद्देश्य के बारे में गहराई से जांच कर सकता है।
इन लेन-देन को ध्यान में रखते हुए, यदि आपको इन प्रकार के लेन-देन करने की आवश्यकता हो, तो बेहतर होगा कि आप आयकर विभाग को इसके बारे में सूचित करें। इससे आप किसी भी संभावित कानूनी परेशानी से बच सकते हैं।
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